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अखिलेश यादव, मायावती व प्रियंका गांधी ने सांसद सुब्रत पाठक पर बोला हमला, रासुका और गिरफ्तारी की मांग

कन्नौज सांसद सुब्रत पाठक और भाजपा समर्थकों के मंगलवार को सदर तहसीलदार के साथ की गई मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के बाद पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस मामले को उठाकर सियासत गर्मा दी है।

मायावती की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया है कि ‘उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे एक दलित तहसीलदार के साथ अभी हाल ही में वहां के बीजेपी सांसद ने जो मारपीट व दुर्व्यवहार आदि किया है, यह अति शर्मनाक है। लेकिन दुख की बात यह है कि सांसद अभी भी जेल में जाने की बजाय बाहर ही घूम रहा है, जिससे पूरे प्रदेश में दलित कर्मचारियों में जबरदस्त रोष व्याप्त है।

ऐसे में मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे इस मामले में जरूर सख्त कदम उठायें ताकि यह सांसद आगे कभी भी ऐसी हरकत न कर सके। साथ ही पूरे प्रदेश में, खासकर दलित कर्मचारियों के साथ आगे ऐसा कोई भी बर्ताव न हो तो इसके लिए भी इनको अपने इस सांसद के विरुद्ध तुरंत कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। बीएसपी की यह मांग है।’

भाजपा सांसद सुब्रत पाठक
भाजपा सांसद सुब्रत पाठक

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने अमर उजाला की खबर के साथ फेसबुक पर की गई पोस्ट में कहा, ‘भाजपा सांसद द्वारा कन्नौज के एक तहसीलदार पर किए गए हमले के बाद तहसीलदार की बेटी सहमी हुई है। इस खबर (अमर उजाला में नौ अप्रैल के अंक में पेज तीन पर प्रकाशित) ने बड़ा दुखी कर दिया। ये बच्ची देखती होगी कि जब सब घर पर हैं तब उसके पिता काम पर जा रहे हैं और फिर उसने अपने पिता पर हमला होते देखा। अत्यंत निंदनीय।’

सदर तहसीलदार अरविंद कुमार पर हमले के बाद
सदर तहसीलदार अरविंद कुमार पर हमले के बाद

बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बयान जारी कर सांसद सुब्रत पाठक पर रासुका लगाने की मांग की थी। इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भी घटना के दिन ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

सदर तहसीलदार अरविंद कुमार

गुरुवार को अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा सत्ता पक्ष का सांसद एक दलित अधिकारी को मारे या उनका कार्यकर्ता किसी डॉक्टर को तब भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है न ही विपक्ष के नेताओं के बारे में फर्जी खबर फैलाने वालों के खिलाफ. वहीं IAS व IPS की आपसी छींटाकशी को लेकर भी सरकार सुविधाजनक चुप्पी साधे है।

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